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जिला रायगढ़ से रिपोर्ट आई.टी.आई कॉलेज लैलूंगा में छात्राओं का औद्योगिक भ्रमण – तकनीकी ज्ञान की नई उड़ान

लैलूंगा।
तकनीक की दुनिया में कदम-दर-कदम आगे बढ़ रही शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लैलूंगा की छात्राओं ने शुक्रवार को अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई) कॉलेज लैलूंगा का औद्योगिक भ्रमण किया। विद्यालय में वर्ष 2016 से संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं को सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) विषय की पढ़ाई कराई जाती है। इसी क्रम में वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव दिलाने यह भ्रमण आयोजित किया गया, जिसने छात्राओं को तकनीकी दुनिया का प्रत्यक्ष परिचय कराया।

विद्यालय के प्राचार्य आर.एस. नारंग के मार्गदर्शन और आई.टी. विषय के व्यावसायिक प्रशिक्षक धनेश्वर प्रसाद चंद्रा के नेतृत्व में छात्राओं ने आई.टी.आई परिसर के विभिन्न लैब और तकनीकी सेक्शनों का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान प्रशिक्षकों ने छात्राओं को आई.टी. उद्योग में उपलब्ध रोजगार के अवसर, उपकरणों की संरचना एवं कार्यप्रणाली, मशीन संचालन तकनीक तथा उद्योग से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और सभी उपकरणों को नज़दीक से समझते हुए तकनीकी ज्ञान अर्जित किया।

प्रशिक्षक श्री चंद्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय में आई.टी. विषय की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट-आधारित गतिविधियों और आधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जाता है। उनका कहना था कि व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से छात्राओं में तकनीकी दक्षता विकसित हो रही है, जिससे वे भविष्य में रोजगार, स्वरोजगार और तकनीकी क्षेत्र के विविध अवसरों में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सक्षम होंगी।

औद्योगिक भ्रमण के दौरान छात्राओं की ऊर्जा और सीखने का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर सेक्शन में वे गहरी रुचि के साथ उपकरणों को समझती रहीं और प्रशिक्षकों से उद्योग की वास्तविक चुनौतियों व संभावनाओं पर चर्चा करती रहीं।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य आर.एस. नारंग, व्याख्याता जी.एस. राठिया, पी. पैंकरा, डी. गुप्ता, शिक्षक व्ही.आर. साव, ओहमस तिर्की, शिक्षिका नमिता गुप्ता सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने छात्राओं को प्रोत्साहित किया।

औद्योगिक भ्रमण ने छात्राओं को न केवल तकनीकी ज्ञान दिया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और करियर दृष्टि को भी मजबूत बनाया। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के अनुभव छात्राओं के भविष्य को नई दिशा देते हैं और उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।

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